आजकल एक नया सियासी मुद्दा उछाला गया है एक्स मुस्लिम । दरअसल जब से मक्का में इस्लाम का वजूद आया और हज़रत मुहम्मद सल0 ने अल्लाह की वहदानियत का ऐलान किया उसी दिन से इस्लाम का विरोध शुरू हो गया है। यह कोई नई बात नहीं है। हर जमाने में लोग इस्लाम के खिलाफ जाते रहे हैं। मुहम्मद सल0 के विसाल के फौरन बाद मुसयलमा ने अपनी नुबुव्वत का ऐलान कर दिया था उसी समय एक महिला सुवैद बिंत सजाह ने भी यह एलान किया कि अल्लाह मुहम्मद सल0 के बाद मर्द नबी नहीं भेजेगा हाँ औरत नबिया हो सकती है, हालांकि अंत में वह मुसयलमा के झांसे में आ गई और सऊदी अरब के रियाद शहर से 150 किमी दक्षिण एक गाँव अस्फ़ल बातिन जो कि होता बनी तमीम तहसील के अंतर्गत आता है वहीं उसका निकाह मुसयलमा के साथ हो गया और बाद में मुसयलमा ने उसको धोखा दे दिया जिसके बाद वह फिर इस्लाम में वापस आ गई, फिर सारी ज़िंदगी गुमनामी में और अल्लाह से अपने गुनाहों की तौबा में बिताई। और यही मुसयलमा रहती दुनिया तक कज़्ज़ाब यानि झूठा के नाम से जाना जाता रहेगा।
अगर आप एक्स मुस्लिम को गूगल करेंगे तो एक बहुत लंबी लिस्ट आपको दिखेगी, जिनमें एक से एक मशहूर हस्तियाँ शामिल हैं, जब उनका बयोडेटा पढ़ेंगे तो साफ लगेगा कि वह किसी न किसी लालच में इस्लाम से फिरे हैं। उदाहरण के लिए मैं कुछ नाम दे रहा हूँ, जैसे जॉर्डन की अमीना दावूद अलमुफ़्ती जो यहूदी बनीं और बाद में जॉर्डन में मोसाद की एजेंट रहीं। ईरान के रज़ा जाबरी जिन्होने इस्राइल के लिए ईरानी जहाज़ हाइजैक किया था। अब्बासी खलीफा अलमुतवक्किल के बेटे अलमुयय्येद ईसाई धर्म अपना चुके हैं, वैसे ही इंडोनसियन प्रधानमंत्री आमिर जफरुद्दीन ने 1931 में ईसाई धर्म अपनाया। हरीलाल गांधी ने पहले इस्लाम अपनाया उसके बाद फिर हिन्दू धर्म में चले गए।
ऐसे ही पूरी दुनिया में लाखों लोग होंगे जो किसी न किसी कारणवश इस्लाम छोड़ कर दूसरे धर्मों में चले गए मगर गौर करने की बात यह है कि इससे इस्लाम धर्म पर क्या फर्क पड़ा? जब आप इतिहास उठा कर देखिएगा तो पता चलेगा कि उससे बिलकुल कोई फर्क नहीं पड़ा। इस्लाम छोडने वालों से अधिक लोग इस्लाम धर्म को अपना रहे हैं। हाँ अपनाने वाले वही हैं जो इस्लाम कि शिक्षाओं को पढ़ते हैं, वरना आज आप किसी मुस्लिम के साथ रहेंगे या उसको देखेंगे तो इस्लाम से कभी प्रभावित नहीं हो सकते। इस लिए कि इस्लाम इन्सानों से चाहता क्या है यह आप आज के मुसलमानों में बिलकुल देखने को नहीं पाएंगे।
इस्लाम छोड़ कर जाने वालों के बारे में अल्लाह सुब0 ने क़ुरआन की सूरह 3 आयत 144 में खुल कर बता दिया है कि:
وَمَا مُحَمَّدٌ إِلَّا رَسُولٌۭ قَدْ خَلَتْ مِن قَبْلِهِ ٱلرُّسُلُ ۚ أَفَإِي۟ن مَّاتَ أَوْ قُتِلَ ٱنقَلَبْتُمْ عَلَىٰٓ أَعْقَـٰبِكُمْ ۚ وَمَن يَنقَلِبْ عَلَىٰ عَقِبَيْهِ فَلَن يَضُرَّ ٱللَّهَ شَيْـًۭٔا ۗ وَسَيَجْزِى ٱللَّهُ ٱلشَّـٰكِرِينَ ١٤٤
अर्थात मुहम्मद भी वैसे ही रसूल हैं जैसे इससे पहले मैंने दूसरे रसूलों को पैदा किया है, अगर वह मर जाते हैं या कत्ल कर दिये जाते हैं तो क्या तुम अपने पीछे को वापस हो जाओगे? और अगर तुम पीछे को पलट जाते हो तो अल्लाह को रत्ती भर नुकसान नहीं होगा। और अल्लाह शुक्र करने वालों को अच्छा बदला देता है।
अब आप इसकी रोशनी में इतिहास उठा कर देखिये, दुनिया की सबसे एडवांस तकनीक वाली इस्राइल की सेना जिससे पिछले 50 सालों से फलस्तीन के लोग गुलेल से लड़ रहे हैं। अम्रीका जो कि आधुनिक इस्लामोफोबिया का जनक है, आज वह कहाँ है और इस्लाम कहाँ है, हाल यह हुआ है कि जल्द ही उसने एक कमेटी बनाई है जो दुनिया भर में इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देने वालों पर नज़र रखेगी, और उनके खिलाफ कार्यवाही करेगी। अपने देश भारत में ही पिछले दशक का इतिहास उठा कर देखें, आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, अशोक सिंघल, जैसे पता नहीं कितने थे जो सुबह शाम मुसलमानों के खिलाफ जहर उगला करते थे, उस जमाने में रोज़ सुबह का अखबार देश के किसी न किसी शहर में होने वाले दंगे की खबरों से भरे होते थे। वह सारे लोग अब कहाँ हैं और मुसलमान वहीं का वहीं है। दरअसल मुसलमान एक सीढ़ी की तरह है जिस पर चढ़ कर लोग कामयाबी की मंज़िल पा जाते हैं, आप चाहे इस्लाम का विरोध करें या समर्थन। हमेशा एक कहावत याद रखिए कि जिसको अल्लाह रखे उसको कौन चखे?
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