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रविवार, 25 सितंबर 2022

दुकानदार की दुआ

दोस्तो कल मैं ने राजनीति पर एक पोस्ट डाली थी, आज कुछ हंसी हो जाए। इस ब्लॉग पर हर तरह का मसाला मिलेगा। हमारी पूरी कोशिश होगी कि हमसे जुड़े लोग बोर न होने पाएँ ।  


लब पे आती है दुआ बन के तमन्ना मेरी

कम किसी तरह न दौलत हो खुदाया मेरी ॥ 

हो मेरा काम हर एक शय में मिलावट करना 

कोई भी चीज़ हो हर चीज़ को चौपट करना ॥

क्या ज़रूरत है कि मैं लाल ओ जवाहर बेचूँ

इतना मंहगा हो कि गेंहु को मैं गिनकर बेचूँ ॥

*निर्ख हर चीज़ का कुछ और भी *बाला हो जाए 

चाहे दो रोज़ में जनता का दिवाला हो जाए ॥

नफ़ाखोरी से रहे मुझको मुहब्बत या रब

कुछ बिगाड़ें न मेरा अहले हुकूमत या रब ॥

मेरी मुंछों पे रहे यूंही हमेशा ताव 

डालडा बेच दूँ मैं घी से भी ऊंचे भाव ॥

मेरे अल्लाह बुराई से बचाना मुझको

चोर बाजारी के रस्ते पे चलाना मुझको ॥

नाम हल्दी का हो रंगीन बुरादा बेचूँ

खा के पेचिश हो जिसे सबको वह आटा बेचूँ ॥


नाक रगड़ें मेरी चौखट पे जमाने वाले

खुद ही मिट जाएँ मेरा ज़ोर मिटाने वाले ॥

*निर्ख = मूल्य 

*बाला = ऊंचा 


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